हिंदू धर्म में माघी पूर्णिमा का बहुत अहम महत्व है।
इस दिन माघ महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है और इसे धार्मिक, पौराणिक और सामाजिक दृष्टि से बहुत पवित्र माना जाता है।
इस दिन गंगा स्नान, पूजा, दान, व्रत और भक्ति के जरिए आत्मा को पवित्र करने का काम किया जाता है।
माघ महीने का यह उत्सव केवल धार्मिक आचरणों से ही सीमित नहीं है, बल्कि इसे आध्यात्मिक विकास और समुदाय की भलाई का चिह्न भी माना जाता है।
माघी पूर्णिमा की तिथि एवं शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, 11 फरवरी को शाम 06:55 पर माघ पूर्णिमा की शुरुआत होगी।
12 फरवरी को इस पूर्णिमा तिथि का समापन 07:22 बजे शाम को होगा।
हिंदू धर्म में सूर्योदय के बाद से तिथि की मान्यता है।
12 फरवरी को माघ पूर्णिमा मनाई जाएगी।
माघी पूर्णिमा का पौराणिक महत्व
माघी पूर्णिमा से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं हैं जो इस दिन की दिव्यता को दर्शाती हैं।
मधु-कैटभ वध
पुराणों के मुताबिक, इस दिन भगवान विष्णु ने मधु और कैटभ असुरों को मारकर देवताओं को मुक्त कराया था।
इस कहानी बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
त्रिपुरासुर का नाश
एक और कथा के अनुसार, भगवान शिव ने माघी पूर्णिमा को त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध किया था।
इसकी वजह से माघी पूर्णिमा पर भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
चंद्रमा की उपासना
माघी पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पूरी चमक में होता है। इसे मानसिक और भावनात्मक शांति का प्रतीक माना जाता है।
चंद्रदेव की पूजा करने से मानसिक तनाव कम हो जाता है।

माघी पूर्णिमा के धार्मिक अनुष्ठान
पवित्र स्नान
धर्मग्रंथों के अनुसार, माघ मास में प्रतिदिन पवित्र नदियों में स्नान करने से अच्छे कर्मों का फल मिलता है।
हालांकि, माघी पूर्णिमा को स्नान का विशेष महत्व है।
इस दिन शुद्ध जल में स्नान करने से कहा जाता है कि व्यक्ति के सारे पापों का प्रशान्त हो जाता है।
दान और पुण्य की महत्वता
माघी पूर्णिमा पर अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़ और घी का दान अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।
इससे जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है।
पितृ तर्पण
इस दिन पितरों को तर्पण देने से उनकी कृपा प्राप्त होती है।
पितृ दोष से मुक्ति प्राप्त करने के लिए इस दिन का महत्व अत्यधिक है।
भगवान विष्णु और शिव की पूजा
भगवान विष्णु और शिव जी की पूजा से जीवन में सकारात्मकता आती है।
विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने और “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करने से विशेष फल प्राप्त होता है।

माघी पूर्णिमा व्रत और पूजन विधि
उपवास के नियम
माघी पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पहले ऊठकर स्नान करें।
पूरे दिन भोजन का त्याग करके या केवल फल खाकर उपवास रखें।
दिनभर भजन, संगीत प्रदर्शन और धार्मिक ध्यान करें।
संध्यावेले में भगवान विष्णु और शिवजी की पूजा करें।
पूजन विधि
स्नान और मानसिक समाधि
प्रातःकाल पवित्र नदी में अभिषेक करें। यदि यह संभव न हो, तो स्नान के पानी में गंगा जल मिलाएं।
स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य दें।
पूजा की स्थिति
पूजा स्थल को स्वच्छ रखें और गंगाजल स्पर्श करें।
भगवान विष्णु और शिव की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं।
मंत्र जप
भगवान विष्णु के “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार पाठ करें।
शिवजी के “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जप करें।
आरती और प्रसाद वितरण
भगवान की आरती उतारें और प्रसाद अर्पित करें।
प्रसाद को सभी भक्तों के बीच बाँटें।
माघी पूर्णिमा में किए जाने वाले विशेष कार्य
कुम्भ स्नान: माघी पूर्णिमा के दिन कुंभ स्थलों में, जैसे प्रयागराज, हरिद्वार, और उज्जैन, स्नान का विशेष महत्व है। लाखों श्रद्धालु इस दिन कुंभ मेले में स्नान करने जाते हैं।
हवन और यज्ञ: इस दिन हवन और यज्ञ करने से घर और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का विस्तार होता है।
सत्संग और कथा श्रवण: भागवत कथा और रामायण का सुनना इस दिन विशेष फलदायी होता है।
पितृ तर्पण: पितरों को जल अर्पित करने और श्राद्ध कर्म करने से पितृ दोष कम होते हैं।

माघी पूर्णिमा के लाभ
- इस दिन के पूजा-पाठ और व्रत से आत्मा शुद्ध हो जाती है।भक्ति और ध्यान से मानसिक सुकून और आनंद प्राप्त होता है।
- पवित्र स्नान और दान से व्यक्ति के पापों का नाश होता है।मोक्ष प्राप्ति के लिए यह दिन अत्यंत शुभ होता है।
- दान-पुण्य से समाज में सद्भाव और सहयोग की भावना बढ़ती है।
- गरीबों और आवश्यकता प्रकट करने वालों की सहायता से समाज में खुशहाली और शांति प्राप्त होती है।
- ठन्डे पानी में स्नान करने से रक्त संचार उत्कृष्ट होता है और स्वास्थ्य फायदे मिलते हैं।
- ध्यान और भक्ति से मानसिक तनाव कम हो जाता है।
माघी पूर्णिमा का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
माघ पूर्णिमा केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि समाज के लोगों को एक साथ लाने का एक तरीका भी है।
इस दिन, लोग समूह में इकट्ठा होकर भजन-कीर्तन करते हैं, सत्संग में भाग लेते हैं और सामूहिक भोजन का आयोजन करते हैं।
इस उत्सव से आपसी प्रेम और सौहार्द को बढ़ावा मिलता है।
माघी पूर्णिमा से जुड़े अन्य पर्व
- गुप्त नवरात्रि महिने माघ में भी विधिवत किया जाता है। इस समय शक्ति की पूजा का खास महत्व है।
- प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर स्नान और उपासना का आयोजन होता है।
- प्रयागराज में माघ मेला का आयोजन किया जाता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती हैं माघी पूर्णिमा
माघ पूर्णिमा हमें प्राकृतिक दायित्व की ओर ध्यान देने के लिए प्रेरित करती है।
पवित्र नदियों में स्नान करने और उनके संरक्षण की महत्वता समझाती है कि हमें जल स्रोतों की सफाई और संरक्षण करने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
निष्कर्ष
माघी पूर्णिमा एक धार्मिक उत्सव है जो आत्मशुद्धि, पवित्रता और आध्यात्मिक प्रगति का प्रतीक है।
इस दिन किए गए सामाजिक कर्तव्य हमें हमारे जीवन को सुधारने का अवसर प्रदान करते हैं और हमें समाज और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी याद दिलाते हैं।
इस महोत्सव से हमें यह सिखाने की विधि मिलती है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ हम अपने जीवन को उच्चतम स्तर पर ले जा सकते हैं।
इसलिए, माघी पूर्णिमा को नियमित ढंग से मनाना चाहिए।
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