गणेश चतुर्थी, हिंदू धर्म का एक प्रमुख उत्सव है जिसमें भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है। 16 फरवरी 2025 को यह व्रत मनाया जाएगा।
इस दिन को संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है “संकट को हरने वाली चतुर्थी।” लोग इसे श्रद्धा और भक्ति से मनाते हैं।
व्रतीगण को इस दिन व्रत करने से सभी कठिनाइयाँ दूर होती हैं और उन्हें जीवन में सुख-समृद्धि मिलती है।
इस लेख में गणेश चतुर्थी व्रत के महत्व, कथा, विधि, और संबंधित सभी जानकारी शामिल है।
गणेश चतुर्थी व्रत तिथि
गणेश चतुर्थी व्रत फरवरी 2025 में पूर्णिमा के बाद की चौथ में पढ़ रहा हैं। गणेश चतुर्थी व्रत 16 फरवरी को पड़ेगा।
इस दिन चंद्रोदय 06:07 रात्रि में होगा।

गणेश चतुर्थी का महत्व
गणेश चतुर्थी व्रत इतिहासकार लेखों में वर्णित है। यह व्रत भगवान गणेश की कृपा प्राप्ति के उद्देश्य से किया जाता है, जिन्हें विघ्नहर्ता के रूप में जाना जाता है।
भगवान गणेश मान्यता है जैसे बुद्धि, ज्ञान और शुभ फल देने वाले देवता। किसी भी शुभ कार्य की प्रारंभिक आरम्भ गणेश पूजा के माध्यम से की जाती है। इस व्रत से भक्तों की सभी कठिनाइयाँ दूर हो जाती हैं।
धार्मिक विश्वास के अनुसार, जो व्यक्ति इस दिन पूरी ईमानदारी से व्रत रखता है, उसे लम्बी आयु, सफलता और समृद्धि प्राप्त होती है।
यह व्रत केवल भौतिक सुख ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक लाभ भी प्रदान करता है। गणेश चतुर्थी दिन गणेश भगवान के लिए तिल और गुड़ से बनी भोग बहुत शुभ माना जाता है।
गणेश चतुर्थी व्रत विधि
गणेश चतुर्थी व्रत को पूरा करने के लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन करें:
सुबह की तैयारी:
व्रत के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करके शुद्ध कपड़े पहनें। पूजा स्थान को गंगाजल या साफ पानी से साफ करें।
संकल्प करें:
भगवान गणेश का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके दौरान यह निश्चित करें कि आप पूरे दिन निराहार या फलाहार व्रत रखेंगे।
गणपति की स्थापना:
पूजा स्थल पर भगवान गणेश की मूर्ति या चित्र रखें। मूर्ति को शुद्ध जल से स्नान कराएं और उस पर सिंदूर लगाएं।
पूजन सामग्री:
पूजा के लिए तिल, गुड़, दूर्वा घास, सिंदूर, चावल, फूल, फल, नारियल, मोदक, पंचामृत, दीपक, धूप, और गंगाजल का उपयोग करें।
पूजा विधि:
भगवान गणेश को दूर्वा समर्पित करें। उन्हें मोदक और गुड़ का प्रसाद चढ़ाएं। गणेश मंत्र “ॐ गं गणपतये नमः” का जप करें।
गणेश की आरतीकरें और पूजा को परिवार के सदस्यों के साथ समाप्त करें।
व्रत की पालना:
अन्न का सेवन रोकें और केवल फलों और जल का सेवन करें। पूरे दिन गणेश भजन और स्तोत्र का पाठ करें।
चंद्रोदय के समय पूजा:
चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलें। चंद्र दर्शन से बचें, क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है।

व्रत के समय सावधानियां
- चांद को न देखें। यदि भूल से चांद देख लिया तो सुनें स्यमंतक मणि की कहानी।
- उपवास के दिन साफ-सफाई और पावनता का खास ध्यान रखें।
- पूजा के समय मन को शांत रखें और पूरी श्रद्धा से भगवान गणेश का ध्यान करें।
गणेश चतुर्थी व्रत के लाभ
श्री गणेश चतुर्थी व्रत करने से आपको निम्नलिखित लाभ अवश्य प्राप्त होंगे:-
- सभी संकटों का समाधान:
इस व्रत को करने से जीवन में सभी मुश्किलें दूर हो जाती हैं। - धन और आर्थिक समृद्धि:
भगवान गणेश की आशीर्वाद से धन और संपदा में वृद्धि होती है। - मानसिक सजीवता और ज्ञान:
छात्रों के लिए यह व्रत विशेष रूप से लाभदायक है। - परिवारिक सुख:
घर में शांति और परिवार का सुख समृद्धि स्थिर रहता है। - पापों का नाश:
व्रत करने से व्यक्ति के समस्त पाप मिट जाते हैं।
व्रत के लिए विशेष उपाय
गणेश चतुर्थी व्रत में को निम्नलिखित कार्य करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं।
- भगवान गणेश के लिए तिल और गुड़ से बनी मिठाई का आह्वान करें।
- गरीबों को भोजन और परिधान दान दें।
- गणेश चालीसा और संकट नाशक गणेश स्तोत्र का उच्चारण करें।
- घर के प्रमुख दरवाजे पर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें।
गणेश चतुर्थी व्रत में चंद्र दर्शन और उसकी कथा
चतुर्थी के दिन चंद्र देखना अशुभ है। पुराणिक कहानी के अनुसार, चंद्रमा ने गणेश जी का मजाक उड़ाया था, जिससे गणेश जी नाराज हो गए और उन्होंने उन पर श्राप दिया।
इस श्राप के अनुसार, जिसको भी चंद्र का दर्शन होगा, उसपर कलंक लगेगा। इसलिए, इस दिन चंद्र देखने से बचें।
अगर किसी को गलती से चंद्र देखना पड़ जाए, तो स्यमंतक मणि की कहानी सुनें।
स्यमंतक मणि की कहानी के लिए “TAP” करें

गणेश चतुर्थी व्रत का समापन
गणेश चतुर्थी व्रत समापन चंद्रमा को अर्घ्य देने और प्रसाद वितरण के साथ होता है।
उस दिन भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए परिवार और दोस्तों के साथ पूजा करें।
निष्कर्ष
गणेश चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने और जीवन को आनंदमय बनाने का एक विशेष मौका है। 16 फरवरी 2025 को इसे पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से मनाएं।
भगवान गणेश की पूजा से आपके जीवन में आनंद, शांति और समृद्धि की वर्षा होगी।
इस पावन दिन को अपने परिवार के साथ बिताएं और भगवान गणेश के पादों में अपना समर्पण दर्पित करें।
श्री गणेशाय नमः।